क़र्ज़दार हूं उन आंखों का
जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा।
एक लड़की जिसने प्रेम में
मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा
और हर वाक्य को महाकाव्य
मेरी हर मौन उदासी में रोई
मेरे एहसास के साथ ही सोई
यह भरम ही सही जीवन का
मेरे होने से ही उसका जीवन है।
क़र्ज़दार हूं उन आंखों का
जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा।
एक लड़की जिसने प्रेम में
मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा
और हर वाक्य को महाकाव्य
मेरी हर मौन उदासी में रोई
मेरे एहसास के साथ ही सोई
यह भरम ही सही जीवन का
मेरे होने से ही उसका जीवन है।
जब ठठाकर हंस देती है सारी दुनिया,
बिना किसी बात पर..
अचानक कंधे पर बैठ जाती है गौरेया
कहीं किसी अंतरिक्ष से आकर..
चोंच में दबाकर सारा दुख
उड़ जाती है फुर्र..
फिर न दिखती है,
न मिलती है कहीं..
मगर होती है
सांस-दर-सांस
प्रेम की तरह..
क़र्ज़दार हूं उन आंखों का जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा। एक लड़की जिसने प्रेम में मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा और हर वाक्य को महाकाव्य मेरी हर...