बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

एक सूरज टूट कर बिखरा पड़ा है...

सीने में जलन, आंखों में तूफान-सा क्यों है...
एक शायर मर गया है,
इस ठिठुरती रात में...
कल सुबह होगी उदास,
देखना तुम....

देखना तुम...
धुंध चारों ओर होगी,
इस जहां को देखने वाला,
सभी की...
बांझ नज़रें कर गया है....
... एक शायर मर गया है....

मखमली यादों की गठरी
पास उसके...

और कुछ सपने पड़े हैं आंख मूंदे....
ज़िंदगी की रोशनाई खर्च करके,
बेसबब नज़्मों की तह में,
चंद मानी भर गया है.....
एक शायर मर गया है....

एक सूरज टूट कर बिखरा पड़ा है,
एक मौसम के लुटे हैं रंग सारे....
वक्त जिसको सुन रहा था...
गुम हुआ है...
लम्हा-लम्हा डर गया है....
एक शायर मर गया है...
इस ठिठुरती रात में....

(एक पुरानी नज़्म, शहरयार साहब की यादों के साथ दोबारा पढ़ें)

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

मैं उस शहर से लौटा हूं अजनबी की तरह...



तस्वीर में मैं हूं और मेरे बचपन का साथी मेरा बैट....
ज भी उस मकान में रखा मिला,
जहां बचपन का बड़ा हिस्सा गुज़रा.
ऊपर की फोटो ईटीसी मैदान की है, मेरा फेवरेट मैदान
 मैं उस शहर से लौटा हूं अजनबी की तरह....

जहां पहाड़ के ऊपर बसा है एक मंदिर
एक पत्थर को दूध से नहलाती भली-सी लड़की
मैं उसकी कलाई पे हौले से हाथ रखता हूं
और पहुंच जाती है मेरी छुअन पत्थर तक !
मैं मुस्कुराता हूं उस अजनबी लड़की के साथ
जिसने पहुंचाए हैं पत्थर तक मेरे जज़्बात..

जहां पत्थरों से भी ख़ुदा का रिश्ता था...
मैं उस शहर से लौटा हूं अजनबी की तरह....

वो एक घर जहां पाये की ओट में अब भी
पड़े हैं बैट, विकेट मुद्दतों से, मुरझाए...
सफेद रंग की बूढ़ी-सी झड़ती दीवारें
ज़रा-सा छू भी दूं तो रंग हरा हो जाए
सभी के नाम फ़कत नाम नहीं, रिश्ते थे
दुआ की शक्ल में माथे पे कितने बोसे थे

जहां की छत भी गले लग के रोई बरसों...
मैं उस शहर से लौटा हूं अजनबी की तरह....

यहां शहर में कोई आदमी नहीं मिलता
वहां गली में कोई अजनबी नहीं मिलता
वो किसी और ही मिट्टी से तराशे गए लोग
ऐसी मिट्टी कि चढ़ता ही नहीं और कोई रंग
वो एक बोली जो मीठी थी बिना समझे भी
जहां बाक़ी है नज़रों में अब तलक ईमान

जहां महफूज़ है रूह मेरी बरसों से...
मैं उस शहर से लौटा हूं अजनबी की तरह....

(हाल ही में रांची से लौटकर लिखी गई नज़्म......)

ये पोस्ट कुछ ख़ास है

नदी तुम धीमे बहते जाना

नदी तुम धीमे बहते जाना  मीत अकेला, बहता जाए देस बड़ा वीराना रे नदी तुम.. बिना बताए, इक दिन उसने बीच भंवर में छोड़ दिया सात जनम सांसों का रिश...

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई पोस्ट