जब ठठाकर हंस देती है सारी दुनिया,
बिना किसी बात पर..
अचानक कंधे पर बैठ जाती है गौरेया
कहीं किसी अंतरिक्ष से आकर..
चोंच में दबाकर सारा दुख
उड़ जाती है फुर्र..
फिर न दिखती है,
न मिलती है कहीं..
मगर होती है
सांस-दर-सांस
प्रेम की तरह..
जब ठठाकर हंस देती है सारी दुनिया,
बिना किसी बात पर..
अचानक कंधे पर बैठ जाती है गौरेया
कहीं किसी अंतरिक्ष से आकर..
चोंच में दबाकर सारा दुख
उड़ जाती है फुर्र..
फिर न दिखती है,
न मिलती है कहीं..
मगर होती है
सांस-दर-सांस
प्रेम की तरह..
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| तस्वीर में मैं हूं और मेरे बचपन का साथी मेरा बैट.... आज भी उस मकान में रखा मिला, जहां बचपन का बड़ा हिस्सा गुज़रा. ऊपर की फोटो ईटीसी मैदान की है, मेरा फेवरेट मैदान |
यह बात किसी शास्त्र में लिखी तो नहीं मगर तय है कि किसी भी सफ़ल हत्या के पीछे एक पुरुष का हाथ ज़रूर होता है। वह किसी भी शक्ल में तुम्हारे पास...