शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

प्रेम ऋण

क़र्ज़दार हूं उन आंखों का

जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा।


एक लड़की जिसने प्रेम में 

मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा 

और हर वाक्य को महाकाव्य

मेरी हर मौन उदासी में रोई

मेरे एहसास के साथ ही सोई

यह भरम ही सही जीवन का

मेरे होने से ही उसका जीवन है।


निखिल आनंद गिरि

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