क़र्ज़दार हूं उन आंखों का
जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा।
एक लड़की जिसने प्रेम में
मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा
और हर वाक्य को महाकाव्य
मेरी हर मौन उदासी में रोई
मेरे एहसास के साथ ही सोई
यह भरम ही सही जीवन का
मेरे होने से ही उसका जीवन है।
प्यार क्या है यह समझने के लिए न कोई किताब काम आती है न कोई धर्मगुरु एक बारिश में कोई लड़की अगर भीगते हुए किसी भेलपुरी के ठेले पर करती रहे ...
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