क़र्ज़दार हूं उन आंखों का
जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा।
एक लड़की जिसने प्रेम में
मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा
और हर वाक्य को महाकाव्य
मेरी हर मौन उदासी में रोई
मेरे एहसास के साथ ही सोई
यह भरम ही सही जीवन का
मेरे होने से ही उसका जीवन है।
आमुख - दिख रही है दूर से तस्वीर धुंधली लग रहा है सांवला आकार मेरा कह रहे हैं लोग सौ बातें मगर पास आकर देखिए व्यवहार मेरा कविता - अ से हुए ...
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