रविवार, 31 अक्तूबर 2010

अथ मुई लिपस्टिक कथा...

प्यार कर लिया तो क्या, प्यार है ख़ता नहीं...
(यहां क्लिक करें तो यूट्यूब पर वीडियो भी उपलब्ध है..)

प्रथम अध्याय

आईआईटी रूड़की में एक कार्यक्रम के दौरान इंजीनियरिंग के कुछ छात्रों ने अचानक अनोखी प्रतियोगिता रख दी। लड़कों को अपने होठों में लिपस्टिक दबाकर लड़कियों के होठों पर मलनी थी। लड़कों ने ऐसा किया, लड़कियों ने भी भरपूर साथ दिया...मगर लिपस्टिक मलने से मीडिया वाले लाल हो गए। उनके पास कैमरे थे तो वीडियो भी आ गया। वीडियो आया तो टीवी चैनल्स पर ख़बर चलने लगी। किसी चैनल ने कहा कि ये अनोखी प्रतियोगिता थी तो किसी ने होठों से छू लो तुम जैसे आकर्षक टाइटल के साथ तस्वीरें दिखानी जारी रखी। कुछ चैनल्स ऐसे थे जिन्हें लड़कों के लिपस्टिक लगाने से भारतीय संस्कृति को ख़तरा महसूस होने लगा। उन्हें हर दिन भारतीय संस्कृति घोर ख़तरे में नज़र आती है।

दूसरा अध्याय

उन्होंने भारतीय संस्कृति को बचाने का अभियान छेड़ दिया। एक से बढ़कर एक संत-महात्मा-मौलवियों को जुटाकर विमर्श शुरू हो गया कि भई, ये तो घोर पाप है। ये कौन-सी इंजीनियरिंग है। मतलब, ये तो सरासर शिक्षा जगत को शर्मसार कर देने वाली घटना है। इन छात्रों पर कार्रवाई अब तक क्यूं नहीं हुई। इनके मां-बाप को बुलाया जाए। उनसे पूछा जाए कि क्या संस्कार दिए अपनी औलादों को। भई, लिपस्टिक मलना इंजीनियरिंग के कोर्स का हिस्सा तो है नहीं, फिर क्यूं हुआ ये सब? इंजीनियरिंग वाले ‘बच्चे’ तो दिन-रात एक कर पढ़ाई करते हैं और तब जाकर आईआईटी में एडमिशन पाते हैं। उन्हें लड़कियों के होठों पर लिपस्टिक मलना किसने सिखा दिया। ये तो कोर्स करीकुलम के बाहर की बात है। इस पर तो संस्थान के निदेशक को सस्पेंड कर देना चाहिए। उन्हें शो कॉज़ दीजिए कि आईआईटी में लिपस्टिक आई तो आई कैसे। क्या ये सरकारी फंड का दुरुपयोग नहीं है।

तीसरा अध्याय

लिपस्टिक कांड पर देश-दुनिया के बुद्धिजीवी एक-दूसरे से मुंहलगी में व्यस्त हो गए हैं। डिबेट्स, सेमिनार आयोजित हो रहे हैं। लिपस्टिक को राष्ट्रीय आपदा घोषित किए जाने की पैरवी की जा रही है। जहां कहीं लिपस्टिक दिखाई दे रही है, माननीय बुद्धूजीवी (बुद्धू बक्से के बुद्धिजीवी) लोगों से मुंह ढंककर बच निकलने की अपील कर रहे हैं। होठों से जुड़े तमाम गानों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि युवा पीढ़ी इनके उकसावे में ना आए। महान भारतीय परंपरा का निर्वहन करते हुए सरकार ने एक जांच कमेटी गठित कर दी है जो ये पता लगाएगी कि आखिर 19-20 साल के बच्चों में लिपस्टिक लगाने का शौक कैसे पनपा। इस कमेटी में उन माननीय बुद्धूजीवियों को विशेष तौर पर शामिल किया जा रहा जो सेक्स विषयों पर डेस्क से ही बेहतरीन कार्यक्रम बनाने में सिद्धहस्त हैं। इसके अलावा महिला संगठनों को भी इस कमेटी से दूर ही रखा गया है क्योंकि उन्हें लिपस्टिक से विशेष लगाव है और सरकार को डर है कि जांच के दौरान आईआईटी के लड़के कुछ भी कर सकते हैं।

चौथा अध्याय

बिहार और झारखंड के कई ज़िलों में सरकार ने भोजपुरी गीतों पर बैन लगाना शुरू कर दिया है। सरकार की शिकायत है कि वहां के भोजपुरी गानों में होंठ लाली, लिपस्टिक, और शरीर के बाक़ी अंगों पर बहुत कुछ लिखा-सुना जा रहा है। जैसे ये गाना देखिए-

जब लगावे लू लिपस्टिक, त हिले सारा आरा डिस्टिक (डिस्ट्रिक्ट यानी ज़िला)
कमरिया करे लपालप, लॉलीपप लागे लू....

ऐसे गाने सुन-सुनकर आईआईटी के छात्रों के दिमाग में फिज़िक्स के सूत्र की जगह लिपस्टिक लगाने की उत्कंठा घर करने लगी है। माता-पिता परेशान हैं कि सदियों से चली आ रही डॉक्टरी-इंजीनियरी में भेजने की प्रथा पर रोक कैसे लगाएं। उनके बच्चों के तो डीएनए में इंजीनियरिंग की तैयारी घुसी हुई है। ऐसे में उन्होंने जाना तो इन्हीं संस्थानों में है, जहां साल के आखिर में लिपस्टिक मलकर इंजीनियर बनने का सबूत देना पड़ता है। वैसे, लिपस्टिक कांड पर मीडिया की कृपालु नज़र से कई कोचिंग संस्थानों का फायदा भी होने लगा है। कई गलियों में कोचिंग सेंटर खुलने लगे हैं। यहां आईआईटी के लिए क्रैश कोर्स में लिपस्टिक वाला पैकेज मुफ्त है। लड़की, लिपस्टिक सबकी सुविधा मुफ्त। एक दूसरे कोचिंग संस्थान ने प्रीलिमिनरी राउंड में ऐसे ही कांपटीशन से छात्रों का दाखिला लेने का फैसला किया है। मतलब, आप इंजीनियरिंग की पढाई करना चाहते हैं तो लिपस्टिक लगाना ज़रूर सीख कर आएं। लिपस्टिक इंजीनियरों की पहचान बन गया है। स्टेटस सिंबल बन गया है। अब हर लड़के के पास एक हाथ में इरोडोव की किताब और दूसरे में लिपस्टिक दिखने लगी है। आह! क्या क्रांतिकारी दृश्य है। इंजीनियरिंग का ‘लिपस्टिक काल’, इधर-उधर सब कुछ लाल।

पांचवा अध्याय

मीडिया का असर तो होता ही है। सरकारी तंत्र और मीडिया रिश्ते में मौसेरे भाई लगते हैं। एक नींद में चिल्लाता है तो दूसरा नींद में चलने लगता है। आईआईटी रुड़की में लिपस्टिक ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। संस्थान ने वहां लड़कियों के मिनी स्कर्ट पहनने पर बैन लगा दिया गया है। पहले ये काम सिर्फ फतवा जारी करने वाले मुल्ला किया करते थे। अब ग्लोबलाइज़ेशन अपना असर छोड़ रहा है। हालांकि, कॉलेज की लड़कियां खुश हैं क्योंकि अब तक सिर्फ बड़ी हस्तियों की मिनी स्कर्ट पर ही बैन लगा करता था। और उनकी शादी भी विदेश में होती थी। लड़कियों को इस बैन से संभावनाएं दिखने लगी हैं। एक अदनी सी लिपस्टिक ने उन्हें हस्ती बना दिया है। मगर, मुझे एक बात समझ नहीं आई कि लिपस्टिक होठों पर लगी तो बैन मिनी स्कर्ट पहनने पर क्यों लगा। लिपस्टिक और स्कर्ट का क्या संबंध हो सकता है। ये तो बड़े वैज्ञानिकों के शोध का विषय हो सकता है। शायद आईआईटी से ही इस पर कोई कामयाब रिसर्च निकले। फिलहाल, ये भोजपुरी गाना सुनिए जो आईआईटी वाले जमकर बजा रहे हैं – हाय रे होंठ लाली, हाय रे कजरा....जान मारे तहरो टूपीस घघरा (घघरा यानी मिनी स्कर्ट !!)...

इतिश्री...

निखिल आनंद गिरि
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18 टिप्‍पणियां:

deepak saini ने कहा…

निखिल जी,
बहुत बढिया व्यंग है।
बधाई

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

वैसे लिपस्टिक लगाने का और इसके बाद के भी कार्यक्रमों का एक एक्स्ट्रा चैप्टर, फिजिकल केमिस्ट्री के नाम से रख दिया जायेगा, तो चलेगा.. है न..

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (1/11/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

gaurav ने कहा…

bahut sahi

अनुपमा पाठक ने कहा…

nice post!

DEEPAK BABA ने कहा…

और छट्ठा अध्याय :

आपने एक तो पोस्ट लिख दी.......

बढिया है........



“दीपक बाबा की बक बक”
क्रांति.......... हर क्षेत्र में......
.

दिपाली "आब" ने कहा…

hmmm..khabron ki band bajani shuru nikhil ji
Pr sochne wali baat ye hai ki vandana diii ko ismein bhaavmay kya laga? Same msg har baar..dii... Change to kijiye..

Udan Tashtari ने कहा…

मिडिया कब कहाँ जागृत हो जायेगा, कह पाना असंभव है.

Akhtar Khan Akela ने कहा…

bhaay jan rurki aai aai ti ne lipistik bm bnaaya he jiska dhmaka to hona hi thaa. akhtar khan akela kota rajsthan

राजेश उत्‍साही ने कहा…

आपकी दूरदृष्टि की दाद देनी पड़ेगी।

निर्मला कपिला ने कहा…

ये लिपस्टिक पुराण कितने नम्बर का पुराण है अपने भारत के इतिहास मे? इसे तो सभी पढना चाहेंगे शायद। सटीक। शुभकामनायें।

भगीरथ ने कहा…

इस प्रतियोगिता का आइडिया जबरदस्त है।आइडिया देनेवाले सज्जन को साधुवाद्।संस्कृति कर्मियो के लिये चुनौती।कुछ फ़ोटो भी दिखादेते तो संस्कृति कर्मियो की सेना केम्पस में लठ्ठ बजा देती

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH ने कहा…

हा हा हा!
स्वाद आया!
आशीष
--
पहला ख़ुमार और फिर उतरा बुखार!!!

NIKHIL ANAND ने कहा…

सबका शुक्रिया....
निखिल आनंद गिरि

Rashmi @ sunshine ने कहा…

निखिल जी ..... I am studying at IIT Roorkee.....Thomso देखा मैंने ...but ये lipistic show नहीं देख पाई . बाद में पता चला कि ऐसा कुछ हुआ है यहाँ . अब तक तो बहुत बवाल हो चुका है , वैसे आपकी post मजेदार रही ....बच्चो से गलती हो गयी , शर्मसार भी हैं ......उन्हें क्षमा कर दिया जाना चाहिए .

DJ ने कहा…

Ultimate yaar
maza aa gaya.
I have added to my favourite bookmarks

Keep blogging
Thanks
Dhanjit Giri

pooja goswami ने कहा…

वाह.... बढ़िया पोस्ट। ।

Manish ने कहा…

गजब !! अन्तिम वाला गाना आप प्ले करने का भी जुगाड़ कर दिये होते तो... ;)