प्यार क्या है यह समझने के लिए
न कोई किताब काम आती है
न कोई धर्मगुरु
एक बारिश में कोई लड़की
अगर भीगते हुए
किसी भेलपुरी के ठेले पर करती रहे इंतज़ार
तो यह है प्रेम का प्रवेशद्वार
वह दिन के हिसाब से कपड़े पहने
जैसे मंगल को पीला
बुध को हरा
या गुरु को सुनहरा
और फिर कहे कि
उसकी इतवार का रंग
कोई और तय करता है
तो वह प्यार में है।
कोई उस ट्रेन को देखने
रोज़ प्लेटफॉर्म तक आए
जिसमें बैठ कर दूर चला गया प्रिय
एसी कोच के भैया से रिश्ता बनाए
कि वो बता सके
बर्थ नंबर 23 के यात्री
किस तरह से गुजारते हैं रात का सफ़र
और कौन से प्रेमगीत गुनगुनाते हैं
ज़िन्दगी में इतने शोर के बीच
बचा रहे मौन का कोना
और थोड़ा सा ईमानदार रोना
इसके लिए चाहिए हीरे जैसा ईमानदार मन
जो किसी से न डरे
और सबसे प्यार करे