मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

लड़के सिर्फ जंगली...

क्या ऐसा नहीं हो सकता,

कि हम रोते रहें रात भर

और चांद आंसूओं में बह जाए,

नाव हो जाए, कागज़ की...

एक सपना जिसमें गांव हो,

गांव की सबसे अकेली औरत

पीती हो बीड़ी, प्रेमिका हो जाए....

मेरे हाथ इतने लंबे हों कि,

बुझा सकूं सूरज पल भर के लिए,

और मां जिस कोने में रखती थी अचार...

वहां पहुंचे, स्वाद हो जाएं....

गर्म तवे पर रोटियों की जगह पके,

महान होते बुद्धिजीवियों से सामना होने का डर

जलता रहे, जल जाए समय

हम बेवकूफ घोषित हो जाएं...

एक मौसम खुले बांहों में,

और छोड़ जाए इंद्रधनुष....

दर्द के सात रंग,

नज़्म हो जाए...

लड़कियां बारिश हो जाएं...

चांद हो जाएं, गुलकंद हो जाएं,

नरम अल्फाज़ हो जाएं....

और मीठे सपने....

लड़के सिर्फ जंगली....

निखिल आनंद गिरि

Subscribe to आपबीती...

13 टिप्‍पणियां:

saanjh ने कहा…

हम रोते रहें रात भर

और चांद आंसूओं में बह जाए,

waah...kya socha hai...kamaal hai, too good ;)



मेरे हाथ इतने लंबे हों कि,

बुझा सकूं सूरज पल भर के लिए,

और मां जिस कोने में रखती थी अचार...

वहां पहुंचे, स्वाद हो जाएं....

chooo chweeeeeet.....!
;)

bohot bohot cute hai. aapke likhne ka style bohot kamaal ka hai...random thoughts ko bas yunhi ek saath daal diya aur nazm ho gayi...khoob hai...brilliant

दिपाली "आब" ने कहा…

to aapko bidi peene wali premika chahiye.. Hmmmm
isi liye kaha, ladke sirf jungli.. Mast hai
mujhe ant bahut accha laga

दिपाली "आब" ने कहा…

saanjh mujhse pehle aa gai... Heheheehe

saanjh ने कहा…

@deep....

oye...tu bi hai...online aaja ;)

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
हम रोते रहें रात भर

और चांद आंसूओं में बह जाए,
वाह ! क्या बात है।

neelam ने कहा…

एक पंक्ति बड़ी अचंभित करती है

गांव की सबसे अकेली औरत

पीती हो बीड़ी, प्रेमिका हो जाए....


क्या परिकल्पना है ..................

neelam ने कहा…

गर्म तवे पर रोटियों की जगह पके,

महान होते बुद्धिजीवियों से सामना होने का डर

जलता रहे, जल जाए समय

हम बेवकूफ घोषित हो जाएं...

ye bhi laajwaab hai ............

raghunath ने कहा…

बहुत बढ़िया...एक तो मैं ऐसे हीं दुबला हूं...तुम्हारी कविता पढ़ के और भी जल-भुन जाता हूं...क्या चाहते हो...बहुत खूब दोस्त..

saanjh ने कहा…

aaj badtameezi ki hadein paar kar rahi hoon...aap doosre shaqs hain jise apne blog par aane ko keh rahi hoon...i mean request kar rahi hoon ;) bohot buri cheez hai ye blogs ki duniya...sochte hain ke bas apne dil se likhne jaayenge...magar pata nahin kab...dimaag ghoom jaata hai aur comments ki taraf dekhne lagte hain...to lagta hai ke jis pyaar se maine ikhi thi...us pyaar se kisi ne padha nahin...

i know im being stupid...haina

moreover...aap bohot zameenee shaqs hain..aapki nazmon se maaloom hota hai...apni ek post par aapka response jaan'na chaahti hoon

अबयज़ ख़ान ने कहा…

बड़े ज़माने बाद किसी का ब्लॉग पढ़ा है। बहुत उम्दा है. वैसे तो पूरी नज़्म बहुत अच्छी है, लेकिन ये चार लाइनें बहुत ही बढ़िया हैं। लड़कियां बारिश हो जाएं...

चांद हो जाएं, गुलकंद हो जाएं,

नरम अल्फाज़ हो जाएं....

और मीठे सपने....

लड़के सिर्फ जंगली....
फिर आपकी कलम का तो वैसे भी जवाब नहीं..

निखिल आनन्द गिरि ने कहा…

कभी-कभी स्टूपिड होना पड़ता है सांझ....वैसे हम आपके ब्लॉग पर आ जाएंगे, बदतमीज़ी करने की ज़रूरत नहीं.....हां, ब्लॉगिंग मेरे लिए पाठक बढ़ाने का ज़रिया नहीं है, जो चाहे लिखता हूं, जिसे मन हो पढ़ ले....आप भी यही करिए...काम भर लोग खुद ही आ जाएंगे ....शुक्रिया, मेरी ज़मीनी शख्सियत पहचानने का....वैसे, इतनी जल्दी राय बनाना अच्छी बात नहीं, वो भी बिना मिले...कौन सी पोस्ट पर मेरा रिस्पॉंस चाहती हैं, ये तो बताईए....और वो दूसरा शख्स कौन है, जिसके साथ आप बदतमीज़ी कर चुकी हैं....

pooja ने कहा…

बहुत प्यारी कविता है निखिल जी,


लड़कियां बारिश हो जाएं...

चांद हो जाएं, गुलकंद हो जाएं,

नरम अल्फाज़ हो जाएं....

और मीठे सपने....

लड़के सिर्फ जंगली....

लड़कों से भी कहिये ना कि वे थोड़े सभ्य हो जाएँ, मासूम हो जाएँ, तरतीब वाले हो जाएँ .

महान होते बुद्धिजीवियों से सामना होने का डर

जलता रहे, जल जाए समय

हम बेवकूफ घोषित हो जाएं...

बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैं यह भी.

पर यह बीड़ी पीती लड़कियों वाला मामला कुछ गढ़ बढ़ लग रहा है!!!

jeetnekeeaadathai ने कहा…

एक सफल फिल्मी गीतकार बनने की राह पर हो जनाब।

वैसे बीड़ी पीने वाली औरत मिली या नहीं ?