मैं दर्द ए सर हूं, पर मुझको, वो ताज ए सर समझती है
मेरी चालाकियों को भी मेरा हुनर समझती है
मैं क्या बतलाऊं दुनिया को, मुझे क्या क्या मिला उससे
मेरी खामोशियों में भी मुझे शायर समझती है
यह समीक्षा इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के लिए लिखी जा रही है, जो वहां शायद ही छप सके। क्योंकि वहां जिसे (सौरभ द्विवेदी) वर्ल्ड क्लास संपादक समझ र...
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