मैं दर्द ए सर हूं, पर मुझको, वो ताज ए सर समझती है
मेरी चालाकियों को भी मेरा हुनर समझती है
मैं क्या बतलाऊं दुनिया को, मुझे क्या क्या मिला उससे
मेरी खामोशियों में भी मुझे शायर समझती है
प्यार क्या है यह समझने के लिए न कोई किताब काम आती है न कोई धर्मगुरु एक बारिश में कोई लड़की अगर भीगते हुए किसी भेलपुरी के ठेले पर करती रहे ...
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