मैं दर्द ए सर हूं, पर मुझको, वो ताज ए सर समझती है
मेरी चालाकियों को भी मेरा हुनर समझती है
मैं क्या बतलाऊं दुनिया को, मुझे क्या क्या मिला उससे
मेरी खामोशियों में भी मुझे शायर समझती है
वह कॉल सेंटर वाले दिन थे। तब मोहम्मदपुर का नाम मोहम्मदपुर ही था। अर्जुन भैया से बातचीत में मैंने इसे मोहब्बतपुर सुना था। ट्रेन में रांची से ...
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