आपबीती
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं
रविवार, 12 अप्रैल 2026
प्रेम कविता
मैं दर्द ए सर हूं, पर मुझको, वो ताज ए सर समझती है
मेरी चालाकियों को भी मेरा हुनर समझती है
मैं क्या बतलाऊं दुनिया को, मुझे क्या क्या मिला उससे
मेरी खामोशियों में भी मुझे शायर समझती है
निखिल आनंद गिरि
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