आमुख -
दिख रही है दूर से तस्वीर धुंधली
लग रहा है सांवला आकार मेरा
कह रहे हैं लोग सौ बातें मगर
पास आकर देखिए व्यवहार मेरा
कविता -
अ से हुए अशोक जहां पर, ज्ञ से उपजा ज्ञान
उस बिहार का दुनिया भर में होता रहे गुणगान।
मिथिला की माटी में खुशबू भरी मखाने वाली
लोकतंत्र की जननी, जिसका नाम अमर वैशाली
कण कण में इतिहास बसा है, मन मन में सम्मान।
उस बिहार का दुनिया भर में होता रहे गुणगान।
मधुबनी की चित्रकला और विद्यापति के गीत
बिस्मिल्लाह की शहनाई से उपजा यहीं संगीत
हुए भिखारी ठाकुर जैसे नाटककार महान
उस बिहार का दुनिया भर में होता रहे गुणगान।
सोनपुर के मेले में, जन जन पशु धन शामिल है
जहां ढला है सूरज तब भी पूजा के काबिल है
जहां दधीचि और कर्ण ने किया सर्वस्व का दान
उस बिहार का दुनिया भर में होता रहे गुणगान।
जहां गांधी के चरण पड़े तो चंपारण लहराया
इसी भूमि से प्रथम नागरिक भारत को मिल पाया
कुंवर सिंह, जेपी, कर्पूरी जननायक हैं शान
उस बिहार का दुनिया भर में होता रहे गुणगान।
महावीर की जन्मभूमि यह, बुद्ध की अमर कहानी
बचपन में यहीं गोबिंद सिंह ने सीखी थी गुरबानी
आठ पहर हों मधुर आरती, पांचों पहर अज़ान
उस बिहार का दुनिया भर में होता रहे गुणगान।
हम गिरमिटिया, जहां गए हैं, उस बंजर को तराशा
हम अतीत का स्वर्णिम पन्ना, हम भविष्य की आशा
हम नवीन भारत के शिल्पी, भरें विश्व में प्राण
उस बिहार का दुनिया भर में होता रहे गुणगान।
धन्यवाद
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