मैं किसान हूँ
आसमान में धान बो रहा हूँ
कुछ लोग कह रहे हैं
कि पगले!
आसमान में धान नहीं जमा करता
मैं कहता हूँ
पगले!
अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है
तो आसमान में धान भी जम सकता है
और अब तो दोनों में से
कोई एक होकर रहेगा
या तो ज़मीन से भगवान उखड़ेगा
या आसमान में धान जमेगा.
रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’
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वाह। विद्रोही जी। अब तो कुछ न कुछ होकर रहेगा।
जवाब देंहटाएंhan kuch na kuch to hona hi chahiye
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