सोमवार, 28 मई 2007

लोहे का स्वाद .......

इसे देखो
अक्षरों के बीच घिरे हुए आदमी को पढो
क्या तुमने सुना
कि यह लोहे की आवाज़ है
या मिट्टी में गिरे खून का रंग
लोहे का स्वाद लोहार से मत पूछो
घोङे से पूछो
जिसके मुँह में लगाम है

-सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

इस पोस्ट पर कुछ कहिए प्लीज़

ये पोस्ट कुछ ख़ास है

मैं तुम्हें आकाश के सब पंछियों में देखता हूं

सारी यादें, सारी बातें, लौ में जलता छोड़ आया हां वहीं पर, मैं वहीं पर मन मचलता छोड़ आया। जो हुआ बस हो गया, उस रात यूं होना नहीं था मैं कहां ...