क़र्ज़दार हूं उन आंखों का
जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा।
एक लड़की जिसने प्रेम में
मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा
और हर वाक्य को महाकाव्य
मेरी हर मौन उदासी में रोई
मेरे एहसास के साथ ही सोई
यह भरम ही सही जीवन का
मेरे होने से ही उसका जीवन है।
क़र्ज़दार हूं उन आंखों का
जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा।
एक लड़की जिसने प्रेम में
मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा
और हर वाक्य को महाकाव्य
मेरी हर मौन उदासी में रोई
मेरे एहसास के साथ ही सोई
यह भरम ही सही जीवन का
मेरे होने से ही उसका जीवन है।
क्या इस पृथ्वी पर एक भी ऐसा देश नहीं
जहां सब घड़ियों में अच्छा समय हो
क्या नहीं कोई ऐसी नदी
जहां मछलियां एक दूसरे का भोजन नहीं बनतीं
क्या मेरे पास एक भी ऐसी कविता नहीं
जिसे कोई उदास औरत अपने अकेलेपन में गुनगुना सके
क्या नहीं कोई एक भी पंक्ति
जिसे बच्चे को लोरी की तरह सुना सकें माएं
या एक भी ऐसा शब्द जिससे
हिंसा दूर दूर तक न झलकती हो
क्या नहीं मेरे पास कोई एक भी याद
जिसे प्रलय के समय मुस्कुराते हुए जेब से निकालूं
या एक भी यात्रा नहीं बची मेरे पास
जिसमें बिछड़ने का दृश्य विचलित न करे।
कहां से लाऊं, कहां को जाऊं।
क़र्ज़दार हूं उन आंखों का जिन्हें सिर्फ़ सुन्दर दिखा। एक लड़की जिसने प्रेम में मेरे हर अक्षर को वाक्य समझा और हर वाक्य को महाकाव्य मेरी हर...