शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

वो एक साल था, जाने कहां गयां यारो

वो एक साल था, जाने कहां गया यारों
बड़ा बवाल था, जाने कहां गया यारों।
हरेक लम्हे को जीते रहे तबीयत से
भरम का जाल था, जाने कहां गया यारों।
चलो ये साल, नयी बारिशों से लबलब हो
बहुत अकाल था, जाने कहां गया यारों।
बिछड़ के खुश हुआ कि और भी उदास हुआ
बड़ा सवाल था, जाने कहां गया यारों।
जो जा रहा है, कभी लौट के भी आ जाता
यही मलाल था, जाने कहां गया यारों।
नए निज़ाम में सब कुछ नया-नया होगा
हसीं ख़याल था, जाने कहां गया यारों

निखिल आनंद गिरि

2 टिप्‍पणियां:

  1. यही सवाल है कि क्या सवाल करुं यारों।
    जियूं उन लम्हों को या मौज-ए यादें बेखबर।

    जवाब देंहटाएं
  2. यही सवाल है कि क्या सवाल करुं यारों।
    जियूं उन लम्हों को या मौज-ए यादें बेखबर।

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