रांची में मेरे बचपन के दोस्त राहुल का घर। कलाकार पत्नी ने छोटे से घर की रौनक में चार चांद लगा दिए हैं। नवंबर में जाना हुआ और बहुत सी यादों के साथ वापसी।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
ये पोस्ट कुछ ख़ास है
दुनिया उर्फ प्लेस्कूल
मुफ्त का प्लेस्कूल है दुनिया मेरी बच्ची देखती है सिगरेट पीते किसी लड़के को , और देखती रह जाती है। एक बकता है गाली , दूसरा थूकता है , ...
-
कौ न कहता है कि बालेश्वर यादव गुज़र गए....बलेसर अब जाके ज़िंदा हुए हैं....इतना ज़िंदा कभी नहीं थे मन में जितना अब हैं....मन करता है रोज़ ...
-
छ ठ के मौके पर बिहार के समस्तीपुर से दिल्ली लौटते वक्त इस बार जयपुर वाली ट्रेन में रिज़र्वेशन मिली जो दिल्ली होकर गुज़रती है। मालूम पड़...
-
आईने ने जब से ठुकराया मुझे हर कोई पुतला नज़र आया मुझे। रौशनी ने कर दिया था बदगुमा, शाम तक सूरज ने भरमाया मुझे। ऊबती सुबहों के सच मालूम था, र...










कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
इस पोस्ट पर कुछ कहिए प्लीज़