रांची में मेरे बचपन के दोस्त राहुल का घर। कलाकार पत्नी ने छोटे से घर की रौनक में चार चांद लगा दिए हैं। नवंबर में जाना हुआ और बहुत सी यादों के साथ वापसी।
मंगलवार, 6 दिसंबर 2022
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
ये पोस्ट कुछ ख़ास है
जेब जितने बड़े आदमी के लिए कविताएं
1) जल्दी लौट आऊंगा यह कहकर रोज़ निकलता हूं देर से लौटता हूं रोज़। ट्रैफिक के नियम एक बच्चे के लिए नहीं बदले जा सकते नहीं बदली जा सकती बच्चे ...
-
कौ न कहता है कि बालेश्वर यादव गुज़र गए....बलेसर अब जाके ज़िंदा हुए हैं....इतना ज़िंदा कभी नहीं थे मन में जितना अब हैं....मन करता है रोज़ ...
-
छ ठ के मौके पर बिहार के समस्तीपुर से दिल्ली लौटते वक्त इस बार जयपुर वाली ट्रेन में रिज़र्वेशन मिली जो दिल्ली होकर गुज़रती है। मालूम पड़...
-
कवि मित्र अंचित ने जर्नल इंद्रधनुष पर कुछ दिन पहले मेरी कुछ कविताएं पोस्ट की थीं जिस पर एक सुधी पाठिका की विस्तृत टिप्पणी आई है। कीमोथेरेपी...









