प्रेम!!
प्रेमी सोचता है
किउसकी आँखों की भाषा सिर्फ वही पढ़ रही है
उसके संकेतों को सिर्फ़ वही समझ रही है
इस तरह का भ्रम प्रेमिका को भी होता है
भ्रम न रहे तो बताइए प्रेम कैसे हो!
शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2007
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
ये पोस्ट कुछ ख़ास है
प्यार की पहचान
प्यार क्या है यह समझने के लिए न कोई किताब काम आती है न कोई धर्मगुरु एक बारिश में कोई लड़की अगर भीगते हुए किसी भेलपुरी के ठेले पर करती रहे ...
-
कौ न कहता है कि बालेश्वर यादव गुज़र गए....बलेसर अब जाके ज़िंदा हुए हैं....इतना ज़िंदा कभी नहीं थे मन में जितना अब हैं....मन करता है रोज़ ...
-
छ ठ के मौके पर बिहार के समस्तीपुर से दिल्ली लौटते वक्त इस बार जयपुर वाली ट्रेन में रिज़र्वेशन मिली जो दिल्ली होकर गुज़रती है। मालूम पड़...
-
दिल्ली में कई बार ऐसा हुआ कि मैं और मेरे मुसलमान साथी किराए के लिए कमरा ढूंढने निकले हों और मकान मालिक ने सब कुछ तय हो जाने के बाद हमें क...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
इस पोस्ट पर कुछ कहिए प्लीज़