शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

प्रश्न

क्या इस पृथ्वी पर एक भी ऐसा देश नहीं

जहां सब घड़ियों में अच्छा समय हो

क्या नहीं कोई ऐसी नदी

जहां मछलियां एक दूसरे का भोजन नहीं बनतीं


क्या मेरे पास एक भी ऐसी कविता नहीं

जिसे कोई उदास औरत अपने अकेलेपन में गुनगुना सके

क्या नहीं कोई एक भी पंक्ति

जिसे बच्चे को लोरी की तरह सुना सकें माएं

या एक भी ऐसा शब्द जिससे

हिंसा दूर दूर तक न झलकती हो


क्या नहीं मेरे पास कोई एक भी याद

जिसे प्रलय के समय मुस्कुराते हुए जेब से निकालूं

या एक भी यात्रा नहीं बची मेरे पास

जिसमें बिछड़ने का दृश्य विचलित न करे।


कहां से लाऊं, कहां को जाऊं।


निखिल आनंद गिरि

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

इस पोस्ट पर कुछ कहिए प्लीज़

ये पोस्ट कुछ ख़ास है

जेब जितने बड़े आदमी के लिए कविताएं

1) जल्दी लौट आऊंगा यह कहकर रोज़ निकलता हूं देर से लौटता हूं रोज़। ट्रैफिक के नियम एक बच्चे के लिए नहीं बदले जा सकते नहीं बदली जा सकती बच्चे ...