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राख

दुनिया का फ़लसफा किसी किताब ने नहीं एक मुट्ठी राख ने सिखाया जब तक सांस रही वह एक हंसता खेलता शरीर रही। जब वह राख हुई तब मुट्ठी भर रह गया वजूद...