मंगलवार, 3 मई 2011

एक उदास मौत और ख़ूबसूरत सपना...

सफेद पन्नों पर उसने ख़ून से कुछ लिखा और मर गया। पुलिस के पास जब ये ख़बर पहुंची तो उन्होंने मौत से दुखी हुए बिना अपनी ड्यूटी निभाई और लड़के के मां-बाप से मोटी रकम वसूल की ताकि बाहर बदनामी न हो। उसकी प्रेमिका(ओं) के पास जब ये ख़बर पहुंची तो उन्हें इस बेवकूफी पर कुछ समझ नहीं आया कि कैसे रिएक्ट करें। लिहाज़ा, उन्होंने शादी कर ली। कुल मिलाकर एक उदास मौत ने कई घरों को उजड़ने से बचा लिया। अवसाद एक ऐसा शब्द है जिसे इन मौकों पर ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। अवसाद कहीं भी किसी को हो सकता है। अगर कोई 50 साल की राजनीति के बाद भी प्रधानमंत्री न बन सके तो गहरा अवसाद लाज़िमी है। अगर किसी को सत्ता का स्वाद पहली बार चखने का मौका मिले और वो हर सड़क पर अपनी मूर्तियां ही लगवा बैठे तो इसे भी अवसाद की श्रेणी में रखा जा सकता है। किताबें पढ़पढ़कर क्रांति के नारे बुलंद करने वाले अचानक क्रांति के नाम पर किताबें बेचने लगें तो अवसाद घातक भी हो सकता है। दुनिया में जितनी क्रांतियां रोटी के लिए हुई, हो सकता है उससे कहीं ज़्यादा कांडम के लिए हों।
डिक्शनरी में तीन-चार शब्दों के एक ही मतलब होते हैं। ज़िंदगी में भी यही होता है। वक्त का मतलब सिर्फ गुज़र जाना ही नहीं होता है। वक्त का मतलब एक मजबूरी भी हो सकती है। रात के बारह बजे का वक्त हो तो ज़रूरी नहीं कि पूरा शहर एक दूसरे से प्यार ही कर रहा हो। किसी के पेट में दर्द हो सकता है और किसी को नींद नहीं आने की बीमारी में रोने का मन भी हो सकता है।
उस ख़ास वक्त  में वो भी सोया नहीं था। एक फोन आया तो उसने साफ-साफ एक नंबर देखा कि फोन आया है। बाद में एक मेसैज भी आया कि वेबकैम पर आओ। सच कहूं, तो उसे आने का बहुत मन था मगर ठीक उसी वक्त रोने का वक्त हुआ था। वो रोती आंखों के साथ ज़िंदगी का सबसे ख़ूबसूरत सपना नहीं देख सकता था।

निखिल आनंद गिरि

7 टिप्‍पणियां:

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

khoobsurat rachna

सागर ने कहा…

बहुत शानदार.. पर इक लाइन समझने में थोडा टाइम लग रहा है है...
"दुनिया में जितनी क्रांतियां रोटी के लिए हुई, हो सकता है उससे कहीं ज़्यादा कांडम के लिए हों।"

और इससे सहमत हूँ. कि रात के बाहर बजे किसी के पेट में दर्द भी हो सकता है.

akhilendra ने कहा…

kedam sahi rachna hai....beha hi khubsurat...

मनोज कुमार ने कहा…

आप कमाल का लिखते हैं भाई!
इसे समझने के लिए एक से अधिक बार पढ़ना पड़ता है।

nazish ने कहा…

magar theek usi waqt rone ka waqt hua.. WO ROTI AANKHON KE SATH ZINDAGI KA SABSE KHOOBSURAT SAPNA NAHI DEKH SAKTA THA...
GHAZAB nikhil.. ghazab...
ye jo Tumhari sari rachnao meIN ''WO'' character h ye tum ho kya?

निखिल आनन्द गिरि ने कहा…

Shukriya naaz...blog pe aate rahiye...ye 'wo' koi b ho skta hai,shayad tmhare aaspaas bhi

दीपक बाबा ने कहा…

निखिल जी, क्या लिखते हैं आप.. एक नया ही फलसफा देखने को मिल रहा है ..

@वक्त का मतलब सिर्फ गुज़र जाना ही नहीं होता है। वक्त का मतलब एक मजबूरी भी हो सकती है।